Thursday, 18 February 2016

आइए, शुरूआत करें सुहाने सफ़र की.......


अपने 30 वर्षों के अध्यापन में मैंने छात्रों के जीवन को निकट से देखा, जाँचा और परखा है ।
मैंने अक्सर देखा है कि आजकल के छात्रों में वो उमंग, वो जोश नहीं है जैसा मैंने अपने छात्र-जीवन में महसूस किया था । इसके कई कारण हो सकते हैं जिनमें मुख्य कारण यह है कि आधुनिकीकरण की वजह से
आजकल के बच्चों का प्रकृति से नाता टूट-सा गया है । उन्हें कंप्यूटर,
मोबाइल फोन जैसे इलैक्ट्रानिक उपकरण ज़्यादा लुभाते हैं , जिसके कारण उनका बचपन कहीं खो-सा गया है । बचपन के ये सुनहरे दिन फिर कभी नहीं लौटेंगे । अतः ये बहुत ज़रूरी हो गया है कि बच्चों को इतनी प्रेरणा, इतना प्रोत्साहन दिया जाए कि वे अपना बचपन खुलकर जीते हुए अपने जीवन में मनोवांछित लक्ष्य प्राप्त करें और उनका स्वाभाविक विकास बाधित न हो । वे अच्छे बच्चे, अच्छे नागरिक बनकर जीवन में उन्नति करें ।
इस ब्लॉग के माध्यम से मेरा यह प्रयास है कि मैं छात्रों से रूबरू होकर उनका मार्गदर्शन कर सकूँ और उन्हें प्रेरणा दे सकूँ ताकि वे तो जीवन -क्षेत्र में विजयी हों ही, साथ ही मेरा शैक्षिक जीवन भी सार्थक हो जाए ।

इन्हीं उद्देश्यों और आशा के साथ..............


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